Tuesday, May 29, 2012

समझ


एक खाली कागज़ का टुकडा
थमा दिया तुमने मेरे हाथ
पहले तो में समझ नहीं पाया
क्योकि शब्द नज़र नहीं आ रहे थे उसमे
लेकिन महक रहा था कोना कोना और
दमक रहा था कोरा कागज़
फिर में समझा
तुमने अपनी ज़िन्दगी थमा दी है मुझे
और मुझे इसमें इन्द्रधनुष के रंगों से
रंगीन शब्द लिखने है हमारी ज़िन्दगी में ......
क्यों सही समझा ना में .....?

Friday, May 11, 2012

भ्रम

उसकी बातो के फूल
झरते  हुए बहुत खूबसूरत लग रहे थे
में निहार रहा था उन्हें अपलक -निरंतर
लेकिन जब दूरी कम हुई तो अहसास हुआ
ये फूल नहीं साबुन के बुलबुले है
जो पास आते ही बिखर गए और
दे गए चुभन आँखों में .................

Saturday, March 24, 2012

रूहानी प्रेम

वो राह जिस पर हम चले जा रहे थे


बहुत कांटो भरी थी ,

असहनीय दुःख दर्द का अहसास ,

तुम्हारी तकलीफ से बड़ा दर्द होता था मुझे

और अचानक राह में एक मोड़ आया

जहा से मुड़ गए हम नयी राह के लिए

जुदा होकर, जुदा हो गयी राहे

और अचानक इतने बरसो बाद

फिर मिल जायंगी राहे

सोचा ना था .

लेकिन रूह को सुकून मिला है

तुम्हारी ख़ुशी देख कर

और नाज़ हुआ मेरे रूहानी प्रेम पर .





Thursday, March 22, 2012

सारा सर्व कारिणी


वरद हस्त शक्ति तुम्हारा  मेरे सर पर सदा रहे
प्रेम पुण्य ,करुनामय  आँचल से सदा अमृत बरसता रहे /
गदा ,ढाल ,धनु ,चक्र ,खडग ,बाण कर में धारण करती
त्रिनयना ,अग्निस्वरूपा शरणागत का संकट हरती
लालिमा युक्त वस्त्र सर्व मंगल कारिणी
ईशान पत्नी ,आदि शक्ति  नमस्कार तुम्हे  नारायणी
सर्व सिद्धि  ,सर्व शक्ति , सारा सर्व कारिणी
भगवती ,अम्बिका भक्तो की आश्रय दायनी
सरस सुपावन शक्ति तुम ,सर्व जगत की स्वामिनी.

Monday, March 5, 2012

मेरे मन की नारी .......

वक़्त के साथ चलने की जिद


जीना आज में, खवाब कल का देखना

जमाने की रफ़्तार में आगे रहने का जूनून

लेकिन

परम्पराओं को साथ लिए ,

आधुनिकता अपनाई पर

संस्कार नहीं भूली ......

यही है मेरे मन की नारी .......

Wednesday, February 29, 2012

होली

लघु पर गूढ़ अर्थ है होली का ...


हम आज तक समझे नहीं

त्यौहार नहीं ये सिर्फ ये .....प्रतीक है

राधा और कृष्ण के प्रेम का

भूलने का वो बाते जो हो - ली

और भी गहरा अर्थ जानना चाहे तो

पवित्र का अर्थ भी होली

विभिन्न रंगों में रंगी ये आत्मा .....

अब इश्वर की होली .

Saturday, February 11, 2012

खुशबू उन सूखे हुए फूलो की


बंद है किसी अलमारी में तोहफे में मिली किताबे


अब तो दोस्त तोहफा भी पेन ड्राइव का देते है

गुजरता था वक़्त जो पन्ने पलटने में

अब तो अंगुलिया की बोर्ड पे रख देते है /

कभी नज़रे जमाये बैठते थे किताबो पर

अब कम्प्यूटर की स्क्रीन से हटती नहीं है

कभी सीने से लगाये सो जाते थे उन्हें

अब तो उसकी जगह भी टेबलेट ने ले ली है /

लेकिन नहीं है इस कम्पूटर और टेबलेट में

खुशबू उन सूखे हुए फूलो की

जो मिल जाते थे उन पुरानी किताबो में

जो महका कर उस पल को दिला जाते थे याद

किसी की पहली मुलाक़ात और हसीन लम्हों की