Saturday, March 24, 2012

रूहानी प्रेम

वो राह जिस पर हम चले जा रहे थे


बहुत कांटो भरी थी ,

असहनीय दुःख दर्द का अहसास ,

तुम्हारी तकलीफ से बड़ा दर्द होता था मुझे

और अचानक राह में एक मोड़ आया

जहा से मुड़ गए हम नयी राह के लिए

जुदा होकर, जुदा हो गयी राहे

और अचानक इतने बरसो बाद

फिर मिल जायंगी राहे

सोचा ना था .

लेकिन रूह को सुकून मिला है

तुम्हारी ख़ुशी देख कर

और नाज़ हुआ मेरे रूहानी प्रेम पर .





Thursday, March 22, 2012

सारा सर्व कारिणी


वरद हस्त शक्ति तुम्हारा  मेरे सर पर सदा रहे
प्रेम पुण्य ,करुनामय  आँचल से सदा अमृत बरसता रहे /
गदा ,ढाल ,धनु ,चक्र ,खडग ,बाण कर में धारण करती
त्रिनयना ,अग्निस्वरूपा शरणागत का संकट हरती
लालिमा युक्त वस्त्र सर्व मंगल कारिणी
ईशान पत्नी ,आदि शक्ति  नमस्कार तुम्हे  नारायणी
सर्व सिद्धि  ,सर्व शक्ति , सारा सर्व कारिणी
भगवती ,अम्बिका भक्तो की आश्रय दायनी
सरस सुपावन शक्ति तुम ,सर्व जगत की स्वामिनी.

Monday, March 5, 2012

मेरे मन की नारी .......

वक़्त के साथ चलने की जिद


जीना आज में, खवाब कल का देखना

जमाने की रफ़्तार में आगे रहने का जूनून

लेकिन

परम्पराओं को साथ लिए ,

आधुनिकता अपनाई पर

संस्कार नहीं भूली ......

यही है मेरे मन की नारी .......

Wednesday, February 29, 2012

होली

लघु पर गूढ़ अर्थ है होली का ...


हम आज तक समझे नहीं

त्यौहार नहीं ये सिर्फ ये .....प्रतीक है

राधा और कृष्ण के प्रेम का

भूलने का वो बाते जो हो - ली

और भी गहरा अर्थ जानना चाहे तो

पवित्र का अर्थ भी होली

विभिन्न रंगों में रंगी ये आत्मा .....

अब इश्वर की होली .

Saturday, February 11, 2012

खुशबू उन सूखे हुए फूलो की


बंद है किसी अलमारी में तोहफे में मिली किताबे


अब तो दोस्त तोहफा भी पेन ड्राइव का देते है

गुजरता था वक़्त जो पन्ने पलटने में

अब तो अंगुलिया की बोर्ड पे रख देते है /

कभी नज़रे जमाये बैठते थे किताबो पर

अब कम्प्यूटर की स्क्रीन से हटती नहीं है

कभी सीने से लगाये सो जाते थे उन्हें

अब तो उसकी जगह भी टेबलेट ने ले ली है /

लेकिन नहीं है इस कम्पूटर और टेबलेट में

खुशबू उन सूखे हुए फूलो की

जो मिल जाते थे उन पुरानी किताबो में

जो महका कर उस पल को दिला जाते थे याद

किसी की पहली मुलाक़ात और हसीन लम्हों की

Tuesday, February 7, 2012

बचपन


बचपन की वो अमीरी ना जाने कहा खो गयी
जब बारिश के पानी में हमारे भी जहाज  तैरा करते थे ..
वो हिम्मत वो हौसला कही छुप गया
जब कोहरे की सुबह साइकल पर निकल पड़ते थे
वो  मासूमियत अब  कहा
जब छत पर बैठ तारे गिना करते थे
अब कहा वो बेफिक्री जब 
किसी के उदास होने की फिक्र भी ना किया करते थे  
अब कहा  ऐसी हुकूमत
जब रेत के घर बना उन पर नाम लिख दिया करते थे
अब कहा वो जिंदादिली जब
मिटटी में पानी मिला खूब कीचड़ से खेला करते थे
अब कहा वो अलबेलापन जब
गुब्बारों के रंग पर अटक जाया करते थे
अब समझदारी, दुनियादारी, वफादारी सब निभाने में लगे  है
बचपन की वो नादानी कहा गयी जब इन सबको समझा भी ना करते थे /

Saturday, February 4, 2012

आत्मविश्वास

तुम्हारा रूठना , फिर चुप हो जाना


अच्छा लगता है ,क्योकि तुम जानते हो

में फिर से तुम्हे मना लूंगी ,

इसी आत्मविश्वास के साथ

हर बार रूठ जाते हो

तुम्हारा आत्मविश्वास

खुद पर है या मेरे प्यार पर ????