Saturday, May 15, 2010





Friday, May 7, 2010

मेरी बेटी
तुलसी की मंजरी सी
पतझढ़ के बाद का पहला फूल ,
पहाड़ पर बहता झरना ,
भोर की बेला में चीड़ीयो की चहचाहट,
बादलो में इन्द्रधनुष ,
मंदिर में हवन की खुशबू
संगीत की मीठी तान ,
कोहीनूर की चमक ,
प्रकर्ती का अनुपम उपहार
जिससे मेरे घर में है खुशिया अपार............

Tuesday, April 27, 2010

beej


में सिक्का नहीं हूँ ,
जो जेब से गिर कर ,एक बार खनक कर रह जाऊंगा .....
में वो नन्हा सा बीज हूँ जो जमीन पर गिरा ,
तो एक दिन बड़ा पेड़ बन कर ,
तुम्हारी जिंदगी को चिलचिलाती हुई धुप से बचा कर,
अपनी छाव में बेठऊंगा
में दोस्ती का वो बीज हूँ .....
जो एक बार फल गया तो.
.हर रिश्ते में जी कर दीखाऊंगा

Sunday, April 25, 2010

में नहीं दूंगा तुम्हे तुम्हारी हर समस्या का हल ,
फिर भी सुनुगा तुम्हारे जज़्बात और
साथ बैठ निकालेंगे हल :

में नहीं बदल सकता तुम्हारे अतीत के पल और भविष्य के कहानिया
पर अभी हु तुम्हारे साथ इस पल :

में नहीं रोक सकता तुम्हारे कदमो को डगमगाने से ,
सिर्फ दे सकता हूँ अपना हाथ संभलने के लिए :

तुम्हारी जिदगी के फैसले तुम्हारे अपने होंगे ,
में दूंगा उन्हें सहारा , उत्सा ह और मदद
जब तुम चाहोगे :

में नहीं रोक सकता तुम्हारे दिल को टूटने से ,
पर तुम्हारे पास हूँ तुम्हे सहारा देने और उन टुकडो को जोड़ने के लिए :

मेरी दोस्ती के तुम्हारे जीवन में कोई बंदिशे नहीं होगे ,
में नहीं चाहता तुम उन बेडियों में उलज जाओ ,
सिर्फ जियो मेरे साथ उत्साह उमंग और बिना शर्तो के साथ :

में नहीं बता सकता कोंन हो तुम
पर में हूँ तुम्हारा दोस्त ............एक सुल्ज़ी हुई दोस्ती के साथ