Saturday, March 28, 2020

आजकल फ़िल्मी प्रेम कहानी में लड़का लड़की  के साथ "कड़वी हवा " भी है - संजय मिश्रा 
                                                                                                                                        शब्द - अंशु हर्ष 
                                                                                                                                         Anshu Harsh 

                                                                                                                                         

संजय मिश्रा  एक ऐसे  कलाकार जिन्होंने  सिनेमा  के परदे पर अलग अलग किरदारों को   अपनी अदाकारी से यादगार बनाया है  . गोलमाल , धमाल ,वेलकम और ऐसी  बहुत सी फिल्मों में परदे पर दर्शकों को गुदगुदाया है और देखने वालों  के मन में उस सिनेमा के उसी किरदार के रूप  में पहचान बनायीं है जिस किरदार को उन्होंने निभाया है । इस बात पर संजय कहते है कि ' किस्मत का एक दायरा होता है उस तक पहुंचने के लिए चलना  पड़ता है और मेरी किस्मत के दायरा का सिरा मुझे आँखों देखी तक जा कर मिला जहाँ से लोग संजय मिश्रा  को एक किरदार के नाम से अलग खुद के नाम से जानने लगे वही असली सम्मान होता है जो दर्शक आपको स्वयं देता है और मैं खुशनसीब हूँ की ये सम्मान मैंने मेहनत से पाया है।  आते ही छा  गए इंडस्ट्री में ऐसा नहीं हुआ।  " 

संजय से  पुछा अभी तक निभाए गए किरदारों में  से कौन  सा ऐसा किरदार है जिसे  संजय ने डूब कर  निभाया है तब संजय ने कहा कि में हर किरदार को डूब कर निभाता हूँ मेरे अंदर का कलाकार खुद उस किरदार में डूब जाता है कला के नवरस को हमें परदे पर चित्रित करना होता है और और यही एक कलाकार की परीक्षा होती है या उसकी कला के प्रति उसका समर्पण होता है की वो हर रस को अपनी कला के माध्यम से सफलतम चित्रित करे और  देखने वालो की निगाहों में समा जाये। "

नवरसों से कोई भी रस हो संजय ने हर फिल्म में एक अलग रस को निभा कर अभिनय के क्षेत्र में जो पहचान बनायीं है वो काबिले तारीफ है। कड़वी हवा के क़िरदार में संजय का अभिनय बहुत दमदार नज़र आने वाला है  संजय कहते है कि "उपरवाले का शुक्रगुज़ार हूँ कि मेरी झोली में कड़वी हवा जैसी फिल्म आयी , इसमें अभिनय कर के मुझे ये अहसास हो रहा कि मैंने समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाया है , इस  तरह का सिनेमा बनना चाहिए और लोगो को इसे देखना भी चाहिए।  प्रकर्ति  प्रभाव को हम सोच भी नहीं सकते वो दिल्ली में दिखने लगा है।  प्रशासन इसके प्रति सचेत हुआ है लेकिन   दायित्व है की प्रकर्ति के प्रति अपने व्यवहार को समय रहते सुधार ले वरना वो समय दूर नहीं है जब इस अर्थ का अनर्थ हो जायगा। इसी बात को हमने कड़वी हवा के माध्यम से दिखाने की कोशिश की है। "

इस तरह का सिनेमा जिसमे  हम सामाजिक सरोकारों की बात  करते है व्यावसायिक तौर पर काम चल पाती है लेकिन देखने वालों के दिलों पर एक सवाल जरूर छोड़ती है आँखों देखि के बाद इस तरह की फिल्मे फिर से बनने लगी है इस पर संजय का कहना है कि इस तरह की फिल्मों के सूत्रधार थे  सत्यजीत रे , श्याम बेनेगल सई परांजपे  और बहुत मुश्किल होता था ऐसा सिनेमा बनाना लेकिन अब कमर्शियल सिनेमा के पास भी दिखाने के लिए कुछ नहीं रह गया है इसीलिए फिल्मों की प्रेम कहानी में एक लड़का एक लड़की के साथ अब कड़वी हवा है। सिनेमा से साहित्य गायब सा हो गया है और जिस फिल्म में इसकी झलक नज़र आती है वो निश्चित तौर पर सफल फिल्म है दर्शक ऐसी फिल्मे पसंद कर रहे है   न्यूटन हो , आँखों देखी   मसान ये सभी सफल फिल्मों की श्रेणी में आती है और इनके प्रोडूसर मनीष मूंदड़ा को सलाम करता हूँ कि इस तरह का  सिनेमा इंडस्ट्री में फिर से लाने में वो सफल  हुए है। 

कड़वी हवा में  जो किरदार संजय ने निभाया है उसे निभा कर उन्होंने प्रकर्ति के प्रति अपनी एक जिम्मेदारी को निभाया है लोगो में  जागरूकता लाने के लिए क्योकि हिन्दुस्थान में सिनेमा और क्रिकेट दो ऐसी चीजे है जिनसे दर्शक और जनता जुड़ जाते है सरकार को भी इसके प्रति कुछ कदम बढ़ाने चाहिए की सामाजिक सरोकारों का सिनेमा आम जान तक ज्यादा से ज्यादा पहुंचे व्यावसायिक तौर पर भी और जिम्मेदारिक तौर पर भी।  अगर सरकार सहयोग देती है तो निश्चित तौर पर यह फिल्म एक क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग जैसे इश्यू पर प्रकाश डालती हुई जागरूकता सन्देश बन सकती है। शूटिंग के अनुभव की बात करू तो संजय कटे है कि हम खुशनसीब है कि हमें हवा पानी पर्याप्त मात्रा में अभी भी मिल रहा है बुंदेलखड और धौलपुर के ऐसे जगहों पर हमने शूटिंग की है जहाँ के हालात देख कर दिल दहल जाता है पानी लाने के लिए महिलाये , लड़किया कितनी दूर चल कर जाती है।  इस फिल्म के माध्यम से मैं थोड़ी भी जागरूकता ला सका तो मुझे वास्तविक ख़ुशी का अनुभव होगा संजय अपना काम कर चुका अब आपकी बारी है सोचने की , समझने की और इस कड़वी हवा को बेहतरीन बनाने की।

Date Of Interview - 16 November 2016 #Interview By #AnshuHarsh #SimplyJaipur 
#SanjaiMishra #KadviHawa #Envorment #Earth #Drishyamfilms #Water #Savewater 
 #Directed by #NilaMadhabPanda #ManishMundra #Producer 




Saturday, December 30, 2017

यादों के चरागों को जलाये हुए रखना ..अलविदा 2017

बीते हुए लम्हों की कसक साथ लिए वक़्त अपने रास्ते चला जा रहा है और हम उसे थामने की कोशिश में  ज़िन्दगी के सफ़र में चलते जा रहे है , चलते हुए कई साथ छूटे , कुछ नए कदम इस सफ़र में साथ चल दिये , अपनी नादानियों में चाँद से रूठे कभी सितारों की छांव में भी जले ... कभी अंधेरी राह में दिल जला कर उजाला किया तो कभी कांटों की चुभन के साथ फूलों को दिल में बसाया ...और ये सब मुमकिन हुआ वक़्त के दिए अनुभवों से ...सत्रहवां साल बहुत अहम होता है ज़िन्दगी में चाहे खुद का हो या सदी का जो यह साल सिखाता है वो एक कहानी बन प्रेरक बन जाता है ज़िन्दगी की किताब में ...चलिए चल देते है शब्दों की उंगली थाम बालिग़ वर्ष की ओर ... 
ये सोचते हुए ... यादों के चरागों को जलाये हुए रखना लंबा है सफ़र इसमें कहीं रात तो होगी ....बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी ....

Thursday, July 6, 2017

शब्द ही तो दुनिया तेरी मेरी ....

शब्द ही तो दुनिया तेरी मेरी ....
किसी से मुलाक़ात का पहला आत्मीयता भरा अभिवादन हो या किसी के लिखे गए शब्दो को पढ़ने से मिलने वाला सूकून शब्द ही तो है जो हमें किसी से जोड़ते है।  कभी लिखे गए कभी बोले गए शब्द ही है जो एक नयी दुनिया बना देते है हमारे चारो तरफ ।  प्रेम , हौसला , हिम्मत , प्रोत्साहन ,  मार्गदर्शन , सम्मान सब शब्द ही तो जो जीवन को आधार देते है। इनका जन्म विचार से होता है और फिर ये व्यवहार में उतर आते है। ये व्यवहार हमें रिश्तो में बाँध देता है और फिर हर शख्स सूकून तलाशता है उस रिश्ते में उस व्यवहार से , शब्दो से।  शब्द कभी मुस्कुराते है कभी राजे दिल बयां  करते है , शब्दो से ही आस है विश्वास है और कभी जब शब्द रूठ जाते है तो खामोशी का रूप ले एक अलग अंदाज में नज़र आते है। तब हम वो भी सुन और समझ लेते है जो किसी ने कभी कहा भी नहीं।  शब्दो से ही तो जीवन में गहराई है । वो गहराई जिसका पार  पाना कभी कभी संभव नहीं होता मन डूबता चला जाता है  उस गहराई में जहाँ  से लौट आना असंभव सा लगता है।  
जीवन की ख़ूबसूरती भी तो शब्दों से बयां होती है , शब्द ही तो हमें जीवन की राहें दिखाते है कभी वो राहें जँहा  भीड़ है और कभी सुकून भरी राहे  जंहा तन्हाई है और सिर्फ हम है अपने शब्दो के साथ। हमारी कल्पनाओ को एक रूप देते ये शब्द हमारे जीवन की कहानी लिखते है , हमारे सपनो को एक रूप देते है।
मेरे शब्द मेरी कलम से निकले मेरे जस्बात मेरी बाते मेरे जीवन के अनुभव है।  मुझे नहीं पता ये किसी के जीवन को  बदलने की कितनी ताकत रखते है लेकिन जब मेरी ख़ामोशी को समझकर ये शब्द बाहर निकलते है मेरी कलम से तो मेरे  मन के समंदर में उठती लहरो को सुकून मिलता है।

Wednesday, July 5, 2017

दर्द की सीख

कुछ दर्द जीने लगते है हमारे साथ 
हमारे अंदर , 
गहराइयों तक अपनी जड़े जमाये हुए 
खिलते है उन पर फूल भी 
जो महकते है जीवन भर 
दब जाते है ज़िन्दगी की ज़मीन में वो दर्द 
लेकिन साथ नहीं छोड़ते 
क्योकि वही दर्द तो हमें जीना सिखाते 
कुछ बाते ठहर जाती है 
मन के किसी कोने में दबी हुई 
उलझी हुई 
यही  ठहराव  तो बैचैन किये जाता है 
कभी कभी 
पता नहीं ज़िन्दगी हमें पढ़ती है 
या हम ज़िन्दगी को पढ़ने की कोशिश करते है .

Friday, May 19, 2017

पहले प्यार का पहला ख़त 

पहले प्यार का पहला ख़त  
शनिवार को लिखा 
 क्योकि सुना  था कही 
 शनिवार को शुरू हुआ काम स्थाई होता है 
 और यही तो मैं चाहता था 
 लिखते रहना हर वक़्त 
 क्योकि
 लिखते वक़्त 
हर लम्हा मैं सोचु तुम्हे 
 बताऊ तुम्हे उस वक़्त के बारे में 
 जो   बीत रहा है तुम्हारे बिना 
 तुम्हारी यादो के साथ ……

Saturday, May 11, 2013

खुशिया रहती दामन में और जीवन में अमन होता ...
साथ हो तुमसा उम्र भर , तो मुस्कुराना – अच्छा लगता है
एक तेरे साथ से आती है दुनिया बदलने की ताकत
तेरा हाथ हाथ में हो तो जीवन सुहाना लगता है
धड़क जाता है दिल तेरे आने की आहट पर
तेरा चले जाना बड़ा नागवार लगता है
यु तो साथी बहुत मिल जायंगे जीवन में
हमसफ़र कोई अपना सा हो तो सफ़र सुहाना लगता है .....

Thursday, April 4, 2013

सादगी बड़ी अपनी सी लगती है .......

जीवन में वो सादगी अच्छी लगती है
जब चाय माटी के कुल्हड़ में पी जाती है .......
वो सादगी सुहानी लगती है
जब गीली मिटटी से सौंधी महक आती है .............
वो सादगी मन को भाती है
जब खस की टाट पर पानी की बौछारे ठंडी हवाए लाती है ...
उस सादगी मन को सुकून देती है
जब बर्फ के गोले पर मीठी रसीली रबड़ी अपना स्वाद बिखेरती है
वो सादगी बड़ी सुरीली लगती है
जब एक बांस हवा से बजने लगते है और कान्हा की मुरली कहलाती है
सादगी बड़ी अपनी सी लगती है .......सादगी बड़ी ख़ूबसूरत सी लगती है