Monday, November 19, 2012

बस की बात

हवा की तेज़ सरसराहट से
शाख से अलग हुआ पत्ता
इठलाता , झूमता
घूमता हुआ इधर उधर
बह चला नदी के पानी में
तैरता हुआ ....बोला
ओह ...मुझे तैरना भी आता है ...
यु ही टंगा था इतने दिनों से .??
शाम ढले शाख ने आवाज़ दी ...
लौट आओ ..
पर ..पत्ता हुआ उदास
बोला नहीं रही अब ये
मेरे बस की बात
 
 

कुछ हट के ......

एक डायरी लिखा करता था में ..
जब किसी बाग़ में बैठा
तुम्हारा इंतज़ार किया करता था
बाग़ के फूलो से ज्यादा
तुम्हारी यादे महका जाती थी मझे
और उस पल बन जाता था नए किस्सा
मन की गलियों में और फिजा भी महक जाती थी ...
और अब आज भी डायरी हाथ में है
लिखता हूँ हिसाब उसमे .....
और अब तुम्हारी यादे नहीं
तुम्हारी आवाज गूंज जाती है कानो में .....
और फिर बन जाता है नया किस्सा
और चाय की प्याली फिर ठंडी हो जाती है ......

फुहारे

आसमान से बरसता पानी
कभी तेज़ कभी रिमझिम ...
सुखद अहसास है ..
ठंडी हवाओं का चलना
और बालकनी में बैठ
फुहारों से खेलना
लेकिन ..उसी पल याद आती है
कुछ ऐसे लोगो की
जिनके सर पर है खुला आसमान
और खुली सड़के ही है जिनकी बालकनी
क्या वो भी खेलते है इन फुहारों के साथ या
ये फुहारे खेल जाती है उनकी ज़िन्दगियो से ...........

Thursday, September 27, 2012

लाडली

 

तुमसे है मेरे आँगन में धुप और छाया
तुम ही से तो मेरे बाग़ में फुल मुस्कुराया

तुम हो तो कड़ी धुप भी सुहानी लगती है
तुम से तो बारिश की बूंदे रूहानी लगती है

तुम हो मेरे घर के मंदिर की पूजा
तुम हो गणपति के चरणों की दुर्वा

तुम हो तो रोशन है दिवाली के दिए
तुम से निखरे है होली के रंग खिले
तुम हो भाई की कलाई पर चमकती डोरी
तुम से ही होती है त्यौहार की रोनक पूरी

तुम हो तो एक आस है विश्वास है
तुम से जीवन की हर बात में मिठास है .

तुम हो बेटी मेरे जीवन का मान ,
तुम से ही है लाडली सुख और सम्मान .

Thursday, July 26, 2012

बारिश की बूंदे

नींद भरी आँखों से देखा
कोई दे रहा था दस्तक दरवाजे पर
उठ कर देखा ..
ये तो पहली बारिश की बूंदे थी
और खुश हो गया मन
मनचाहा मेहमान जो आया था
जो अपने संग ले आया था
सुनहरी सूरज की किरने
इन्द्रधनुष , सौंधी सी माटी की महक
सुहानी सी पुरवाई और
हरियाली में डूबी पूरी कायनात
खुले रहने दो दरवाजो को
और बहने दो मौसम को खुमारी से
ता उम्र .......
 

Friday, July 6, 2012

ख़त

वक़्त जो चला गया है तुम्हारे साथ का
उसे भी ख़त लिखा है
एक बार फिर लौट आने के लिए
देखते है
बदला वक़्त ख़त का मतलब जानता है
या उसे भी इ मेल करना पडेगा ...............
( पता है मुझे बिता हुआ वक़्त वापिस नहीं आता मगर यूँ ही ....)

Wednesday, June 6, 2012

ज़िन्दगी

आज बहुत उदास हुआ मन
जब तुमने कहा ......
ज़िन्दगी से डर लगता है
में सोचने लगा
में तो तुम्हे अपनी ज़िन्दगी मानता हूँ ....
और तुम्हारी नज़र में ज़िन्दगी क्या है ??