Monday, November 19, 2012

फुहारे

आसमान से बरसता पानी
कभी तेज़ कभी रिमझिम ...
सुखद अहसास है ..
ठंडी हवाओं का चलना
और बालकनी में बैठ
फुहारों से खेलना
लेकिन ..उसी पल याद आती है
कुछ ऐसे लोगो की
जिनके सर पर है खुला आसमान
और खुली सड़के ही है जिनकी बालकनी
क्या वो भी खेलते है इन फुहारों के साथ या
ये फुहारे खेल जाती है उनकी ज़िन्दगियो से ...........

Thursday, September 27, 2012

लाडली

 

तुमसे है मेरे आँगन में धुप और छाया
तुम ही से तो मेरे बाग़ में फुल मुस्कुराया

तुम हो तो कड़ी धुप भी सुहानी लगती है
तुम से तो बारिश की बूंदे रूहानी लगती है

तुम हो मेरे घर के मंदिर की पूजा
तुम हो गणपति के चरणों की दुर्वा

तुम हो तो रोशन है दिवाली के दिए
तुम से निखरे है होली के रंग खिले
तुम हो भाई की कलाई पर चमकती डोरी
तुम से ही होती है त्यौहार की रोनक पूरी

तुम हो तो एक आस है विश्वास है
तुम से जीवन की हर बात में मिठास है .

तुम हो बेटी मेरे जीवन का मान ,
तुम से ही है लाडली सुख और सम्मान .

Thursday, July 26, 2012

बारिश की बूंदे

नींद भरी आँखों से देखा
कोई दे रहा था दस्तक दरवाजे पर
उठ कर देखा ..
ये तो पहली बारिश की बूंदे थी
और खुश हो गया मन
मनचाहा मेहमान जो आया था
जो अपने संग ले आया था
सुनहरी सूरज की किरने
इन्द्रधनुष , सौंधी सी माटी की महक
सुहानी सी पुरवाई और
हरियाली में डूबी पूरी कायनात
खुले रहने दो दरवाजो को
और बहने दो मौसम को खुमारी से
ता उम्र .......
 

Friday, July 6, 2012

ख़त

वक़्त जो चला गया है तुम्हारे साथ का
उसे भी ख़त लिखा है
एक बार फिर लौट आने के लिए
देखते है
बदला वक़्त ख़त का मतलब जानता है
या उसे भी इ मेल करना पडेगा ...............
( पता है मुझे बिता हुआ वक़्त वापिस नहीं आता मगर यूँ ही ....)

Wednesday, June 6, 2012

ज़िन्दगी

आज बहुत उदास हुआ मन
जब तुमने कहा ......
ज़िन्दगी से डर लगता है
में सोचने लगा
में तो तुम्हे अपनी ज़िन्दगी मानता हूँ ....
और तुम्हारी नज़र में ज़िन्दगी क्या है ??

Tuesday, May 29, 2012

समझ


एक खाली कागज़ का टुकडा
थमा दिया तुमने मेरे हाथ
पहले तो में समझ नहीं पाया
क्योकि शब्द नज़र नहीं आ रहे थे उसमे
लेकिन महक रहा था कोना कोना और
दमक रहा था कोरा कागज़
फिर में समझा
तुमने अपनी ज़िन्दगी थमा दी है मुझे
और मुझे इसमें इन्द्रधनुष के रंगों से
रंगीन शब्द लिखने है हमारी ज़िन्दगी में ......
क्यों सही समझा ना में .....?

Friday, May 11, 2012

भ्रम

उसकी बातो के फूल
झरते  हुए बहुत खूबसूरत लग रहे थे
में निहार रहा था उन्हें अपलक -निरंतर
लेकिन जब दूरी कम हुई तो अहसास हुआ
ये फूल नहीं साबुन के बुलबुले है
जो पास आते ही बिखर गए और
दे गए चुभन आँखों में .................