Saturday, July 23, 2011

सवाल


एक सवाल अक्सर आता है मन में
इश्वर के साकार और निराकार रूप में
कितनी क्या समानता है ..
पर आज सवाल के साथ साथ
जवाब भी आया ....
उतनी ही समानता जितनी
पानी और बर्फ में है .............

Monday, June 6, 2011


Life is like as a 'Game of Snakes and Ladders',
on the way of LIFE ,
we found many Snakes,
...they push back us,
but keep your steps ahead
and sure LADDERS of SUCCESS will keep you at Goal."

Wednesday, June 1, 2011

वक़्त है गुज़र जायगा


अमावास की अँधेरी रात है फिर भी
तारो से रोशन जहां है
कल फिर से चाँद आयगा
वक़्त है गुज़र जायगा .........................
जेठ की तपती दुपहरी है
सूरज भी कडा प्रहरी है
कल रिमझिम सावन आयगा
वक़्त है गुज़र जायगा ..........
एक नन्हा सा बीज बोया है
जल से सींचा और हिफाजत से संजोया है
कल पेड़ बन फलो से लड़ा नज़र आयगा
वक़्त है गुज़र जायगा ......................
जिन्दगी अनसुलझी पहेली है
जितना सुलझाओ उतनी उलझी है
श्रद्धा और सबूरी ही जीवन में काम आयगा
वक़्त है गुज़र जायगा .................
वक़्त अनमोल है गतिशील है
इसको गवाया अगर
तो एक दिन ये हमे गवायेगा
वक़्त गुज़रा है
कल , आज और कल भी गुज़र जायगा ............

Tuesday, May 3, 2011

परदेस में .......


परदेस में .......
ऊँची आसमान छूती इमारते के बादल भी हाथ को छु जाये
जमीन की गहराइयों में सजा बाज़ार और उससे भी कही नीचे मेट्रो का सफ़र
लेकिन फिर भी इंसानी दिलो में उस ऊंचाई की कमी जो अपनों को सातवे आसमान पर पहुचाती है
और दिल की गहाराइयो में वो कमी जो किसी को दिल में बसाती है /

Thursday, April 7, 2011

नियम


आना जाना और फिर से आना ....
अगर यही संसार का नियम है तो ..
नज़र आना जरूर मुझे ..
किसी और रूप में ही सही ...
पर पहचान जाना तुम मुझे .............

Wednesday, April 6, 2011

नारी के रूप



सबसे पहले बेटी के रूप में इस धरती पर आई
इश्वर का अप्रतिम उपहार कहलाई
माँ के सुख दुःख की राजदार
पिता की तरक्की का आगाज
सीने में धडकते दिल का अरमान बन कर जगमगाई
बहन के रूप में
भाई के आँगन की चिड़िया बन चहचहाइ
बगिया में खिले फूलो सी महकाई
भाई की कलाई पर राखी बन कर मुस्कुराई
पत्नी के रूप में
हर रिश्ता जीवन का निभाया इस बंधन में
खुद को भूल कर एक नयी दुनिया बसाई
नए नए रिश्तो को अपनाया फिर भी
ये सुनने को तरसे मन ...
की तुम से ही तो हमारी दुनिया जगमगाई
माँ के रूप में
शब्दहीन है .... माँ की गोद का सुकून ....
जो हर ले ता है सारी पीडा और उलझन ....
उस सुकून भरी गोद का आनंद सब लेते है पर
क्या कीसी ने कभी माँ की पीडा और उलझन की
करनी चाही सुनवाई ...........

Wednesday, February 16, 2011

शक्ति थी तुम


बाई................

एक द्रश्य शक्ति थी तुम , लेकिन अब अद्रश्य हो गयी

यु लगता है जीवन में कुछ कमी सी हो गयी

कहा जायंगे अब हम उलझे मन को लेकर

कोंन सुलझाएगा अनसुलझे सवाल

और

कोंन विश्वास दिलाएगा "राम जी" के होने का ....

जानता है मन तुम साथ हो

एक अद्रश्य शक्ति हो

लेकिन फिर भी पाना चाहता है ये मन

वो मीठे पताशे , वो दूध का प्याला , वो कडकडाते नोट

और उन उंगलियों की पकड़ आज भी .................