Tuesday, September 7, 2010


रिश्ते जीवन का आधार ,

पर बदल जाते है वक़्त के साथ

या रूप बदल जाता है उनका ,

या फिर एक शक्स उलझ जाता है

अपने उत्तरदायित्वों को निभाने में और

नहीं चल पाता हमारे अनुसार और

हम सोच लेते है वो बदल गया,

पर ना रिश्ता बदलता है

न वो सख्स बदलता है ॥

बदल जाती है हमारी सोच ........

जो रिश्तो के रूप को बदल देती है .

Sunday, September 5, 2010


इश्वर की बनायीं स्रष्टि में सब ख़ास होता है

तभी तो वो माँ के रूप के बाद शिक्षक रूप में होता है ...............

छोटा सा बच्चा जब स्कूल में जाता है ...

पेंसिल पकड़ने का ज्ञान उसे शिक्षक ही बताता है ,

उसी कालम के ताकत पर बच्चा सफल होता जाता है ,

किसी को डॉक्टर , इंजिनियर ,किसीको कलेक्टर ......

शिक्षक ही बनाता है .....

शिक्षक वो आग है जो कच्चे घडे को पकाते है ,

जीवन के पथ पर निर्भय होकर चलना सीख्लाते ,

उनका दिया ज्ञान जीवन पर्यंत चलता जाता है ...

खुद उलझा है पर अपने शिष्यों को सुलझाता है ...

शिक्षक है समाज का सबसे अहम् व्यक्तित्व ।

इनके शिक्षा से ही देश के भविष्य की टिकी नींव

शिक्षक है उस मोमबती के सामान

जो स्वयं जलकर ,दूसरो का रोशन करता जहाँ..........

Friday, August 20, 2010


चन्द्रमा की खूबसूरती पर ये काला दाग ...
कीसी ने कहा राहु द्वारा दिया गया चोट का निशान ,
या ब्रह्मा द्वारा रति का मुख बनाने में प्रयुक्त सार भाग
या अपने भाई विष को अपने हर्दय में रखता है चाँद.....
या

शायद सही सीख देता है इस जीवन में
कोई नहीं बेदाग़ यहाँ ....इसलिए
अवगुणों को पीछे कर गुणों को विकसीत कर लो
जिससे ये दुनिया जमी से उठा फलक पर बेठा दे

Thursday, August 19, 2010




कोई परदे में बंद ओर कही बिलकुल बेपर्दा ,
कोई शक्ति का रूप तो कही बिलकुल अबला
कोई ममता का दरिया तो कही क्रूरता की हद ....
क्या है ये.............ये नारी है ..........
कोई दौलत के नशे में मस्त
तो कोई मदीरा पीके पस्त
कोई भाई का दुश्मन तो कोई जीवन सवारने में व्यस्त .....
क्या है ये..........ये नर है


कही सूखी जमीन कही अथा सागर
कही अकाल का साया तो कही भरे है गागर
कही सावन की ठंडी फुहारे तो कही
फटकर बरसते बादल ..........
क्या है ये .....ये प्रकर्ती है

कभी गर्मी के थपेड़े कभी बारिश की फुहार
कभी सर्दी की ठंडक ओर कभी सूखे पतों की मार
कभी बासंती रंग ओर कभी घटाए अपार
क्या है ये ..ये मौसम है ....



कुछ अन्सुल्जे सवाल कुछ निरुत्तर जवाब
कुछ अनकहे शब्द कुछ अनसुने वाक्य
कुछ सपने अधूरे से कुछ पुरे होने को बेताब .
क्या है ये ......ये जीवन है ..

अंशु हर्ष

Tuesday, August 17, 2010


मंदिर में तेज ध्वनि में आरती ,
मज्जिद में अजान के के स्वर ,
चर्च में होती प्रार्थना ,
गुरुद्वारा में कीर्तन के बोल .......
पर फिर भी
मौन प्रार्थना जल्द पहुचती है इश्वर तक ,
क्योकी मुक्त्त होती है वो शब्दों के बोझ से .............

Saturday, July 3, 2010

पिता



इश्वर की एक कृती .......
जिसके व्यक्तित्व में पर्वतो सी कठोरता ...
जीन्दगी की धुप ,छाव बरसात का
मुकाबला करने के लिए .....
जिसके मन में सागर सी गहराई
जिसमे हर गम समां जाये ओर
खुशी की लहरे अपनों को भीगोये ....
जिसकी सोच में आसमान सी ऊँचाई
जो विभिन्न भावों के
सूरज ,चाँद ओर तारो को
अपने बाहों में समेट
गोद में खिलाये ............
इस सर्वश्रेस्ट कृती का नाम है ......पिता
पिता की सीख तेरी शादी की शुभ बेला है .
विदाई का सोच मन बिलकुल अकेला
है जीगर के टुकड़े को सोप देनाकीसी ओर को
विधाता ने कैसा अजब खेल खेला है ......
अब से ससुर पिता ओर सास भी माता है
पति को खुश रखना मेरा धरम तुझे यही सिखाता है
अंगुली थाम के मेने तुझे चलना सिखलाया है
अपने आप पर विश्वास रखना ओर सच्चाई का पाठ पढाया है
वक़्त है बेटी हर पल बदलता रहता है
अमीरी में निरभिमानी ओर गरीबी में धीरजवान होना
मेरा धरम तुझसे ये कहता है
हार अंगूठी कंगन झुमके
ये सब दिखावे के गहने है
सहनशीलता ,शांती सबुरी
ये सब तुमको पहनने है
में तो असहाय पिता हूँ
आसू भी नहीं बहा पाता
बेटी को विदा कर घर से
मन छलनी हो जाता है
पराई नहीं होती कभी बेटी ....
तुम भी ये समझ लेना
इन प्यार भरी नसीहतो को
अपने जीवन में रख लेना
जीवन की भूल भूलाया में
पिता की आँखे पढ़ पाओगी तो
एक नहीं दोनों कुलो के
आँगन में उजियारा फैलाओगी ............